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Trump Iran News: ट्रंप ने ईरान से मांगा युद्ध का मुआवजा, होर्मुज पर बढ़ा तनाव

On: August 12, 2026 2:37 AM
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Trump Iran News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से युद्धों, हमलों और प्रदर्शनों में हुई मौतों के लिए मुआवजे की मांग की है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ होने वाली भविष्य की बातचीत में भी मुआवजे का मुद्दा शामिल रहेगा।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका से हालिया हमलों में हुए नुकसान की भरपाई, प्रतिबंध हटाने और सैन्य दबाव खत्म करने जैसी मांगें रखी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता और पेचीदा होता नजर आ रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर चल रही बातचीत भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस जलमार्ग को लेकर अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।

ट्रंप ने ईरान से क्यों मांगा मुआवजा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर विभिन्न युद्धों और हमलों में लोगों की मौत के लिए जिम्मेदारी का आरोप लगाया है। ट्रंप का कहना है कि इन मौतों के लिए ईरान से मुआवजे की मांग की जानी चाहिए।

खास बात यह है कि ट्रंप ने इस मांग को केवल मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान के साथ भविष्य में होने वाली सभी बातचीत में मुआवजे का मुद्दा शामिल किया जाएगा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सामान्य करने की कोशिशें चल रही हैं।

ईरान ने अमेरिका से क्या मांग की?

अमेरिका की ओर से मुआवजे की मांग के बीच ईरान ने भी अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि हाल के महीनों में हुए अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए।

ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
  • अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना
  • सैन्य दबाव और धमकियां खत्म करना
  • नाकाबंदी समाप्त करना
  • ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करना

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि अमेरिका को ईरान की मांगों को पूरा करना होगा।

इस तरह देखा जाए तो दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर एक-दूसरे से मुआवजे और रियायतों की मांग कर रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों अटका मामला?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। खबर के अनुसार, युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और LNG का परिवहन इसी मार्ग से होता था।

यही वजह है कि इस जलमार्ग में लंबे समय तक किसी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।

ईरान का कहना है कि वह ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नए शिपिंग मार्ग को लेकर समझौते के करीब है। हालांकि, तेहरान ने संकेत दिया है कि समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका की कार्रवाई पर भी निर्भर करेगा।

ईरान और ओमान के बीच क्या बातचीत हुई?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, ईरान और ओमान नए जहाजरानी मार्ग के भौगोलिक स्वरूप और सुरक्षित आवाजाही के तौर-तरीकों पर सहमति के करीब पहुंच गए हैं।

हालांकि, संयुक्त घोषणा से पहले कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना बाकी है।

बातचीत में सुरक्षित नौवहन, पर्यावरण संरक्षण, समुद्री सेवाओं और अपराध रोकने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

ईरान ने यह भी कहा है कि जहाजों को उपलब्ध कराई जाने वाली समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाना सामान्य व्यवस्था है। फिलहाल भुगतान से जुड़े मुद्दे बातचीत का मुख्य हिस्सा नहीं हैं।

अमेरिका और ईरान में सीधी बातचीत क्यों नहीं हो रही?

मौजूदा स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद के बजाय मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।

यानी दोनों देशों के बीच संपर्क पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन बातचीत सीधे आमने-सामने होने के बजाय दूसरे पक्षों की मदद से आगे बढ़ रही है।

ऐसे में मुआवजा, प्रतिबंध और सैन्य दबाव जैसे मुद्दे किसी संभावित समझौते को और जटिल बना सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल

ट्रंप के बयान और ईरान की शर्तों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर दिखाई दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 4.25 प्रतिशत तक बढ़ी। वहीं ब्रिटेन और नीदरलैंड में गैस की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। यदि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

ईरान ने होर्मुज पूरी तरह खोलने पर क्या कहा?

ईरान ने संकेत दिया है कि ओमान के साथ सुरक्षित समुद्री मार्ग को लेकर समझौता होने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब है कि केवल ईरान और ओमान के बीच समझौता हो जाने से समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य होना तय नहीं है।

अमेरिका की सैन्य गतिविधियां, प्रतिबंध और दोनों देशों के बीच व्यापक राजनीतिक समझौता इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ईरान ने सरकार और संसद के बीच मतभेद की खबरों को किया खारिज

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरानी संसद और सरकार के बीच मतभेद की खबरों को भी ईरानी विदेश मंत्रालय ने खारिज किया है।

प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार, सरकार और संसद इस मुद्दे पर समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

संसद की संबंधित समितियां यातायात प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा कर रही हैं और विदेश मंत्रालय भी इस प्रक्रिया में शामिल है।

तेल टैंकर पर हमले से बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता

ओमान की ओर से बताया गया है कि एक तेल टैंकर पर अज्ञात हमले के बाद तेल रिसाव लगभग 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया है। बताया गया कि जहाज धीरे-धीरे डूबने की स्थिति में भी पहुंच रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस टैंकर पर 8 जून को हमला हुआ था। हमले की जिम्मेदारी किसी पक्ष ने नहीं ली थी।

यह जहाज रूस का तेल लेकर एशिया की ओर जा रहा था और ओमान के रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहा था।

इस घटना ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

सऊदी अरब और हाउती के बीच तनाव भी बढ़ा

ईरान-अमेरिका तनाव के साथ पश्चिम एशिया में एक और मोर्चे पर चिंता बढ़ी है। यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हांस ग्रंडबर्ग ने हाउती और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है।

उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की अपील की।

रिपोर्ट के अनुसार, मोखा में हुए हाउती हमले में नागरिकों और सैन्यकर्मियों के मारे जाने तथा कई लोगों के घायल होने की खबरों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

Trump Iran News: आगे क्या होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच मुआवजे, प्रतिबंधों, सैन्य दबाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं।

एक तरफ ईरान समुद्री आवाजाही के लिए ओमान के साथ व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से मुआवजे की मांग ने बातचीत में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है।

अब आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या दोनों देश इन परस्पर विरोधी मांगों के बीच किसी व्यापक समझौते तक पहुंच पाते हैं या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर तनाव और बढ़ता है।

अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। तेल, LNG और समुद्री परिवहन से जुड़े वैश्विक बाजार भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

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