नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी मदद को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने अपना रुख साफ किया है। नेपाल सरकार ने कहा है कि उसने किसी भी मित्र देश या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद से इनकार नहीं किया है। शुरुआती दौर में राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाल के अपने सुरक्षा बलों को प्राथमिकता दी गई थी।
बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल ने विदेशी मदद से इनकार क्यों किया?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मदद को खारिज नहीं किया गया है। बचाव अभियान की रणनीति नेपाल की अपनी क्षमता, तत्काल जरूरत और देश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई।
नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के जवान पहाड़ी इलाकों और स्थानीय परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित हैं। इसलिए आपदा के शुरुआती चरण में इन्हीं सुरक्षा बलों को ज्यादा जिम्मेदारी दी गई।
सरकार का मानना है कि अनजान और दुर्गम इलाकों में विदेशी बचाव दलों की तैनाती से राहत अभियान के दौरान तालमेल और तकनीकी स्तर पर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
भारत और चीन से मांगी गई बेली ब्रिज की मदद
नेपाल में बाढ़ के कारण तीन दर्जन से ज्यादा पुल बह गए हैं। इसके चलते कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। स्थिति को देखते हुए नेपाल ने भारत और चीन से बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
नेपाल सरकार ने करीब 42 बेली ब्रिज बनाने के लिए दोनों पड़ोसी देशों से सहयोग मांगा है।
क्या होता है बेली ब्रिज?
बेली ब्रिज एक तरह का अस्थायी पुल होता है, जिसे अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किया जा सकता है। आपदा के बाद जब सड़क या पुल का संपर्क टूट जाता है, तब ऐसे पुलों की मदद से यातायात और राहत कार्यों को दोबारा शुरू किया जा सकता है।
नेपाल के लिए इस समय इन पुलों की जरूरत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ से प्रभावित कई क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सड़क और पुलों का टूटना बड़ी चुनौती बन गया है।
जरूरत पड़ने पर विदेशी बचाव टीमों की मदद लेगा नेपाल
नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है तो वह विदेशी टीमों की मदद लेने के लिए तैयार है।
यानी नेपाल का रुख विदेशी सहायता को पूरी तरह अस्वीकार करने का नहीं है। शुरुआती बचाव अभियान में स्थानीय सुरक्षा बलों को प्राथमिकता देने के बाद अब जरूरत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जा सकता है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री
नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद भारत की ओर से भी राहत सहायता पहुंचाई गई है। सोर्स के मुताबिक भारत ने राहत सामग्री की दो खेप नेपाल भेजी हैं। इसमें आपदा के बाद जरूरी सामान शामिल है।
भारत ने बचाव और राहत अभियान में हर संभव सहयोग देने की बात कही है।
नेपाल बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नेपाल सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और टूटे हुए संपर्क मार्गों को बहाल करना है।
बाढ़ में पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण कई क्षेत्रों तक पहुंच मुश्किल हो गई है। ऐसे में बेली ब्रिज का निर्माण राहत अभियान के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत और चीन की मदद से अगर प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क जल्द बहाल होता है, तो राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में भी तेजी आ सकती है।










