Brij Bhushan Sharan Singh Court Verdict: बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट के आदेश में मामले से जुड़े आरोपों, गवाहों के बयानों और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को लेकर कई अहम टिप्पणियां की गई हैं।
अदालत ने अपने आदेश में आरोपों के पैटर्न और कुछ गवाहों के बयानों में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को भी इस मामले में बरी किया है।
कोर्ट ने आरोपों को लेकर क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों में कई समानताएं दिखाई देती हैं। कोर्ट के मुताबिक, कथित घटनाओं का समय और स्थान आपस में काफी हद तक समान बताया गया था।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन घटनाओं के आरोप लगाए गए, वे ऐसे स्थानों पर होने की बात कही गई जहां खिलाड़ियों के परिवार और दोस्त सहित कई लोग मौजूद थे।
कोर्ट ने आरोपों के इस पैटर्न को अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना।
दो गवाहों के बयान बदले
मामले में जिन पांच पीड़ितों के आरोपों के आधार पर आरोप तय किए गए थे, उनमें से दो बाद में अपने बयान से मुकर गईं।
इन दोनों ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें कुछ अन्य गवाहों के कहने पर आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया था।
अदालत ने इन दोनों के बयानों को महत्वपूर्ण माना। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों ने किसी दबाव या अन्य कारण से अपने आरोपों का समर्थन नहीं किया।
धरने से पहले शिकायत को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने अभियोजन पक्ष के एक गवाह के बयान का भी हवाला दिया।
कोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड में यह बात सामने आई कि जंतर-मंतर पर धरने से पहले संबंधित गवाह ने यौन उत्पीड़न को लेकर कोई आरोप नहीं लगाया था और किसी महिला पहलवान का नाम भी नहीं लिया था।
इसके बाद कुछ महिला पहलवान सामने आईं और 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई गई।
अदालत ने शिकायतों की भाषा और उनके तैयार किए जाने के तरीके पर भी टिप्पणी की।
आरोपों में समानता को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
दिल्ली की निचली अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों के पैटर्न को भी देखा।
अदालत के अनुसार, अलग-अलग शिकायतों में कथित घटनाओं को लेकर समानताएं थीं। इनमें टूर्नामेंट के दौरान कथित घटनाएं और उनके स्थान का उल्लेख शामिल था।
कोर्ट ने अपने आदेश में इन समानताओं को भी मामले के आकलन का हिस्सा बनाया।
बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पवार ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को भी बरी करने का आदेश दिया।
अदालत की ओर से की गई विस्तृत टिप्पणियां आदेश की प्रति में दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आदेश की प्रति उस समय तक सार्वजनिक नहीं हुई थी।
बृजभूषण सिंह ने फैसले के बाद क्या कहा?
कोर्ट से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि वह पहले भी कहते रहे हैं कि यदि आरोप सही साबित हुए तो वह खुद को फांसी लगा लेंगे। उन्होंने बरी होने के फैसले पर खुशी जताई और इसे अपने तथा अपने समर्थकों के लिए अच्छी खबर बताया।
महिला पहलवानों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई?
अदालत की कार्यवाही के दौरान चार महिलाओं की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने बरी किए जाने के फैसले को बेहद परेशान करने वाला बताया।
मामले में अदालत के फैसले के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
अमित मालवीय ने उठाया सवाल
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी अदालत के फैसले को लेकर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति पर जानबूझकर झूठे आरोप लगाए जाते हैं और राजनीतिक उद्देश्य से उन्हें आगे बढ़ाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आरोपों को हथियार बनाकर मीडिया ट्रायल के जरिए किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
क्या था बृजभूषण सिंह मामला?
यह मामला अप्रैल-मई 2023 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था।
प्रदर्शनकारी महिला पहलवानों ने तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
इस आंदोलन में कई प्रमुख पहलवान शामिल हुए थे। बजरंग पूनिया भी प्रदर्शन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे।
यह प्रदर्शन करीब 36 दिनों तक चला था और इस दौरान महिला पहलवानों की शिकायत तथा भारतीय कुश्ती प्रशासन को लेकर देशभर में बहस हुई।
कोर्ट के फैसले में गवाहों की भूमिका अहम रही
मामले में अदालत के सामने गवाहों के बयान महत्वपूर्ण रहे। खास तौर पर उन दो गवाहों के बयान, जिन्होंने बाद में अपने आरोपों से पीछे हटने की बात कही, अदालत के आकलन का हिस्सा बने।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को देखने के बाद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया।
मामले में अदालत की विस्तृत टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपों के पैटर्न, गवाहों के बदलते बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को फैसले में महत्वपूर्ण माना गया।











