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झारखंड छात्र आंदोलन से राहुल गांधी बैकफुट पर? JPSC विवाद ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल

On: August 12, 2026 2:23 AM
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झारखंड छात्र आंदोलन
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झारखंड छात्र आंदोलन: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार राजनीतिक बहस का मुद्दा बनता जा रहा है। रांची में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी का कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस शामिल है, ऐसे में राहुल गांधी इस पूरे मामले पर खुलकर सरकार के खिलाफ क्यों नहीं बोल रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांगों पर बातचीत करने की अपील की है।

झारखंड में क्यों हो रहा है छात्रों का आंदोलन?

झारखंड में छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 10 अगस्त 2026 को प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर मार्च किया था। इस दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। छात्रों की मांगों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

यह विवाद केवल मौजूदा सरकार तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं।

JPSC विवाद का पुराना कनेक्शन क्या है?

झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। रिपोर्ट में वर्ष 2005 में आयोजित झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में JPSC के तत्कालीन अधिकारियों, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वाले परीक्षकों, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों और अभ्यर्थियों समेत कई लोगों पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की साजिश के आरोप लगे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2008 में सिविल सेवा परीक्षा और झारखंड पात्रता परीक्षा के नतीजे सामने आने के बाद भाई-भतीजावाद के आरोप भी उठे थे। आरोपों में आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सदस्यों द्वारा अपने रिश्तेदारों को सरकारी और शैक्षणिक पदों पर नियुक्त करवाने की बात कही गई थी।

राहुल गांधी पर बीजेपी क्यों उठा रही है सवाल?

झारखंड सरकार में कांग्रेस भी शामिल है। 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा को 34 और कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं। ऐसे में बीजेपी कांग्रेस को घेरते हुए सवाल कर रही है कि राज्य में छात्रों के आंदोलन के बीच राहुल गांधी की भूमिका क्या है।

बीजेपी की मांग है कि कांग्रेस को झारखंड सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए। पार्टी आंदोलन को राज्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा रही है।

हालांकि, राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है और सरकार को छात्रों की बात सुनकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

क्या राहुल गांधी सच में बैकफुट पर हैं?

यह सवाल अब झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण हो गया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की राय एक जैसी नहीं है।

रांची यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर कंजीव लोचन के अनुसार, राहुल गांधी को आंदोलन में सीधे शामिल होने के बजाय छात्रों की मांगों का समर्थन करना ज्यादा व्यावहारिक लग सकता है। उनका तर्क है कि रांची के आंदोलन का स्पष्ट नेतृत्व या संगठन सामने नहीं है, इसलिए राहुल गांधी के लिए सीधे प्रदर्शन में शामिल होना राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है।

उनके मुताबिक राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है और मुख्यमंत्री से बल प्रयोग नहीं करने की अपील भी की है। इसलिए इसे सीधे तौर पर राहुल गांधी का बैकफुट पर आना कहना सही नहीं होगा।

बीजेपी के लिए आंदोलन कितना बड़ा राजनीतिक मौका?

झारखंड में बीजेपी मुख्य विपक्षी दल है। ऐसे में छात्रों की नाराजगी को सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे में बदलना उसके लिए स्वाभाविक रणनीति हो सकती है।

बीजेपी ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आयोजन भी किया। हालांकि, रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषक के हवाले से कहा गया है कि बंद का प्रभाव व्यापक नहीं रहा और रांची में भी इसका असर सीमित दिखाई दिया।

इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या छात्र आंदोलन वास्तव में किसी राजनीतिक दल के नियंत्रण में है या फिर इसका मुख्य कारण छात्रों की परीक्षा व्यवस्था को लेकर वास्तविक नाराजगी है।

कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप

आंदोलन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है।

कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि बीजेपी आंदोलन में भीड़ बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल से लोगों को बुला रही है। पार्टी महासचिव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इस तरह के आरोप लगाए।

दूसरी तरफ बीजेपी और उसके नेताओं का कहना है कि छात्रों की समस्याएं वास्तविक हैं और राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

क्या छात्रों का मुद्दा राजनीति से बड़ा है?

झारखंड छात्र आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि इसके केंद्र में परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास के राजनीतिक सलाहकार रहे अजय कुमार के मुताबिक, झारखंड में छात्रों की परेशानी काफी ज्यादा है और परीक्षाओं में कथित कदाचार के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

रांची यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कंजीव लोचन ने भी आंदोलन में छात्रों की नाराजगी को गंभीर मुद्दा बताया। उनके अनुसार, आंदोलन में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग मौजूद हो सकते हैं, लेकिन इससे छात्रों की मूल समस्या खत्म नहीं हो जाती।

झारखंड आंदोलन का आगे क्या असर हो सकता है?

फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन ने सरकार और विपक्ष दोनों पर दबाव बढ़ाया है। छात्रों की मांगों का समाधान किस तरह होता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

अगर सरकार छात्रों के साथ बातचीत करके उनकी शिकायतों का समाधान निकालती है, तो आंदोलन की तीव्रता कम हो सकती है। लेकिन यदि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर असंतोष जारी रहता है, तो यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और बड़ा बन सकता है।

राहुल गांधी के लिए भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस राज्य सरकार में सहयोगी है। ऐसे में उन्हें एक तरफ छात्रों के मुद्दे का समर्थन करना है और दूसरी तरफ गठबंधन की राजनीतिक जिम्मेदारी भी निभानी है।

यही वजह है कि झारखंड छात्र आंदोलन और राहुल गांधी की भूमिका आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी रह सकती है।

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