नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के करीब 15 महीने बाद भारत के पूर्व चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की एक टिप्पणी ने भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष से जुड़े एक पुराने सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है।
जनरल चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई एक loitering munition संभवतः पाकिस्तान के सरगोधा के पास स्थित किराना हिल्स क्षेत्र में जाकर गिरी होगी। यह इलाका पाकिस्तान के परमाणु ढांचे से जुड़ा माना जाता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भारत ने जानबूझकर किराना हिल्स में मौजूद किसी परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने से इनकार किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तत्कालीन एयर ऑपरेशंस के महानिदेशक एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया था।
जनरल चौहान ने अब क्या कहा?
आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के घटनाक्रम पर आयोजित एक कार्यक्रम में जनरल चौहान ने कहा कि हमलों से पहले भारत ने सरगोधा के आसपास रडार की तलाश के लिए कई loitering munition भेजे थे।
उन्होंने बताया कि इन हथियारों की उड़ान क्षमता करीब दो घंटे की थी। अगर इस दौरान कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो वे अंततः नीचे गिर सकते थे।
इसी आधार पर जनरल चौहान ने संभावना जताई कि इनमें से कोई एक munition किराना हिल्स की पहाड़ियों में जाकर टकराया होगा। उन्होंने इस इलाके से धुआं उठने वाली पाकिस्तानी मीडिया की तस्वीरों का भी उल्लेख किया।
Loitering Munition क्या होता है?
Loitering munition एक ऐसा एकतरफा विस्फोटक ड्रोन होता है जो किसी लक्ष्य के ऊपर या उसके आसपास उड़ सकता है, लक्ष्य की तलाश कर सकता है और फिर उससे टकराकर विस्फोट कर सकता है। इसे आम भाषा में suicide drone भी कहा जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में इस हथियार की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सवाल केवल यह नहीं है कि ड्रोन कहां गिरा, बल्कि यह भी है कि वह अपने निर्धारित लक्ष्य से अलग स्थान तक कैसे पहुंचा।
किराना हिल्स क्यों महत्वपूर्ण है?
किराना हिल्स पाकिस्तान के सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ओर से किराना हिल्स में किसी परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की बात से इनकार किया गया था।
यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भारतीय हथियार के संभावित गिरने की बात सामने आने के बाद रणनीतिक और परमाणु सुरक्षा से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।
क्या भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया था?
उपलब्ध source में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया है कि भारत ने जानबूझकर पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया था।
बल्कि, पहले की रिपोर्टिंग और open-source सामग्री में भी ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला था। भारत ने किराना हिल्स पर हमला करने से इनकार किया था।
इसलिए इस घटना को समझते समय जानबूझकर किया गया हमला और किसी हथियार के अनजाने में किसी दूसरे स्थान पर गिरने की संभावना—इन दोनों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने जनरल चौहान के बयान पर क्या कहा?
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो अंकित पांडा ने कहा कि जनरल चौहान की टिप्पणी मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संकट के एक महत्वपूर्ण अनसुलझे पहलू पर कुछ स्पष्टता देती है।
उनका तर्क है कि अगर loitering munition वास्तव में किराना हिल्स के पास गिरी थी, तो यह संभवतः अनजाने में हुआ हमला हो सकता है। लेकिन ऐसी घटना भारत-पाकिस्तान जैसे परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच सैन्य टकराव के दौरान संभावित परमाणु जोखिम को भी सामने लाती है।
15 महीने बाद सफाई क्यों?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के कुछ समय बाद सामने आई satellite imagery में किराना हिल्स के इलाके में धुआं और असर के निशान दिखाई दिए थे। उनके मुताबिक जनरल चौहान ने बाद में यह स्पष्ट किया कि अगर वहां कोई असर हुआ भी था, तो वह अनजाने में हुआ हो सकता है।
अमेरिका की University at Albany के Associate Professor Christopher Clary ने भी सवाल उठाया कि 15 महीने बाद इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों पड़ी।
क्या इससे भारत की रणनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है?
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर एक जैसी नहीं है।
अंकित पांडा के अनुसार, ऐसी कहानी भारत को अधिक जोखिम लेने वाला या कम सटीक दिखा सकती है और इससे यह धारणा मजबूत हो सकती है कि भारत-पाकिस्तान के बीच पारंपरिक सैन्य संघर्ष तेजी से परमाणु जोखिम में बदल सकता है।
वहीं, JNU के लक्ष्मण कुमार का मानना है कि बयान का उद्देश्य यह संदेश देना हो सकता है कि भारत के पास पहुंच की क्षमता होने के बावजूद उसने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया।
ऑपरेशन सिंदूर पर जनरल चौहान ने और क्या कहा?
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की operational success के पीछे सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर networking और decision-making को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि स्पष्ट राजनीतिक दिशा ने सशस्त्र बलों को अभियान की योजना बनाने की स्वतंत्रता दी।
पाकिस्तान द्वारा satellite imagery के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि Chinese companies की commercial satellite images सभी के लिए उपलब्ध थीं और पाकिस्तान संभवतः अपने हमलों के परिणामों का आकलन करने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहा था।
भारत-पाकिस्तान युद्धविराम पर भी दिया बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता किए जाने के दावों पर भी जनरल चौहान ने टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि युद्धविराम का निर्णय दोनों देशों के Director General of Military Operations (DGMO) के बीच हुआ था और उन्हें किसी अन्य पक्ष की भूमिका नजर नहीं आती।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि युद्धविराम की घोषणा से पहले इसकी जानकारी अमेरिकी पक्ष तक कैसे पहुंची, जबकि भारत इसकी घोषणा करने वाला था।










