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वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस ने 1937 के वर्जन पर लिया बड़ा फैसला, CWC में क्या हुआ?

On: August 20, 2026 3:43 AM
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वंदे मातरम विवाद
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नई दिल्ली: वंदे मातरम विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC की बैठक में पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। बैठक में 1937 के कांग्रेस स्टैंड को दोहराते हुए फैसला लिया गया कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 1937 वाले वर्जन यानी इसके शुरुआती दो पैरा को ही गाएगी।

वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस का बड़ा फैसला

बुधवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में 88 से ज्यादा सदस्य मौजूद थे। पार्टी के अनुसार, वंदे मातरम और राष्ट्रगान दोनों ही उसके लिए भावनात्मक महत्व रखते हैं, लेकिन पार्टी ने इस मुद्दे के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाया।

कांग्रेस ने साफ किया कि वह अपने कार्यक्रमों में 1937 में तय किए गए वर्जन के शुरुआती दो पैरा ही गाएगी।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने पार्टी के रुख को सामने रखा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का स्टैंड पहले से स्पष्ट रहा है।

उन्होंने 1937 में पारित प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई प्रमुख नेता CWC की बैठक में मौजूद थे। इनमें महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद समेत कई नेता शामिल थे।

1937 के वर्जन का क्या है मामला?

कांग्रेस के मुताबिक, 28 अक्टूबर 1937 के प्रस्ताव में वंदे मातरम को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया गया था। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि बाद में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रगान और वंदे मातरम के संबंध में स्थिति दोहराई थी।

यही वजह है कि कांग्रेस अब अपने कार्यक्रमों में 1937 के वर्जन यानी शुरुआती दो पैरा को ही प्राथमिकता देने की बात कह रही है।

बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले पर क्या कहा?

कांग्रेस के फैसले पर बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के प्रस्ताव को निंदनीय बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए पार्टी का प्रस्ताव देश और संविधान से ऊपर हो गया है। उन्होंने वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के मौजूदा रुख की तुलना 1937 के राजनीतिक विवादों से भी की।

इस प्रतिक्रिया के बाद वंदे मातरम विवाद को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।

परिसीमन पर भी कांग्रेस ने साफ किया रुख

CWC की बैठक में सिर्फ वंदे मातरम का मुद्दा ही नहीं उठा। आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने अपना रुख सामने रखा।

पार्टी ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की जरूरत नहीं है और उसकी मांग है कि लोकसभा की कुल 543 सीटों को फ्रीज रखा जाए।

CWC बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चार प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर भी आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

पेपर लीक और युवा प्रदर्शन

कांग्रेस ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर सरकार के रुख की आलोचना की। पार्टी ने देश के 800 से ज्यादा शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाने की बात कही।

‘चंदा चोरी’ का मुद्दा

आर्थिक गड़बड़ियों और चंदा जुटाने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने बूथ और जमीनी स्तर पर जनता के बीच जाने की रणनीति पर चर्चा की।

अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियां

कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मुद्दा बताया।

शिक्षा नीति

कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस योजना तैयार करने को कहा गया।

हल्द्वानी घटना पर पीएम मोदी से माफी की मांग

बैठक में हल्द्वानी घटना का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए व्यवहार को अस्वीकार्य बताया।

कांग्रेस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की।

राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

CWC बैठक के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भी निशाना साधा। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके हैं और कांग्रेस को अपनी विचारधारा पर गर्व करना चाहिए।

वंदे मातरम विवाद क्यों अहम है?

वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत रहा है। ऐसे में इसके गायन के तरीके और अलग-अलग ऐतिहासिक वर्जन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है।

मौजूदा वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस ने अपने पुराने 1937 के स्टैंड को आधार बनाते हुए शुरुआती दो पैरा वाले वर्जन पर कायम रहने का फैसला किया है। वहीं बीजेपी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।

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