सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला किया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि कमेटी पूरे मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच करेगी और समय-समय पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कैसी कमेटी बनाने का फैसला किया?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाई पावर्ड कमेटी बनाने का फैसला किया है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
कोर्ट के मुताबिक कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और DGP रैंक के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को शामिल किए जाने का संकेत दिया गया है।
कमेटी का मुख्य काम फैक्ट-फाइंडिंग होगा। यानी प्रदर्शन के दौरान सामने आए घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई और अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद कमेटी समय-समय पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देगी।
किन मामलों की जांच करेगी हाई पावर्ड कमेटी?
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी केवल प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन से जुड़े कई गंभीर पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा।
इनमें शामिल हैं:
- प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई
- पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा
- महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन हिंसा के आरोप
- ऑनलाइन उत्पीड़न
- सोशल मीडिया के जरिए कमजोर लोगों को परेशान करने के आरोप
- प्रदर्शन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच को उसके तार्किक परिणाम तक पहुंचाया जाना चाहिए।
कमेटी में रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों को शामिल करने पर क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट के सामने कमेटी की संरचना को लेकर दो विकल्प रखे गए थे। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि CBI के एक पूर्व महानिदेशक को सदस्य बनने के लिए सहमत किया गया है। इसके अलावा एक राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक को भी कमेटी में शामिल करने के लिए सहमति मिली है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों के नाम सार्वजनिक करने से उन्हें अनावश्यक विवाद में न डालने के लिए सावधानी बरती जा रही है।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR का क्या होगा?
NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं। प्रदर्शनकारियों की मांगों में इन FIR को रद्द करना भी शामिल था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों से जुड़ी FIR रद्द करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को अलग से देखने की बात कही गई है।
गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों को राहत नहीं?
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी माना कि स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द होनी चाहिए। हालांकि, उनका कहना था कि कुछ ऐसे लोग भी प्रदर्शनों में शामिल हुए थे जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले हैं।
उनके मुताबिक हत्या, रेप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों वाले लोगों की जांच अलग तरीके से की जानी चाहिए। स्रोत में ऐसे मामलों से जुड़े 2,873 लोगों का उल्लेख किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन FIR की सूची जमा करने को कहा है जिनमें केवल स्टूडेंट्स शामिल हैं।
CJP ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने FIR के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार कोर्ट में स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR खत्म करने की बात से सहमत है, तो संबंधित FIR की सूची कोर्ट के सामने पेश करने में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं, प्रदर्शन में शामिल होकर अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर उन्होंने आपत्ति नहीं जताई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित हाई पावर्ड कमेटी का उद्देश्य पूरे मामले में तथ्यों की स्वतंत्र जांच करना है। इससे प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, हिंसा और अन्य गंभीर आरोपों की पड़ताल के लिए एक संस्थागत प्रक्रिया सामने आएगी।
दूसरी ओर, FIR के मामले में कोर्ट ने स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों और गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों के बीच अंतर करने का संकेत दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सभी मामलों को एक ही नजरिए से देखने के बजाय उनकी परिस्थितियों के आधार पर विचार किया जा सकता है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पक्षकार यदि कमेटी को लेकर अपने सुझाव देते हैं, तो उसके बाद आदेश जारी किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कमेटी समय-समय पर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आगे जरूरी कानूनी निर्देश दिए जा सकते हैं।
इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात कमेटी का अंतिम गठन, उसके सदस्यों के नाम और जांच की प्रक्रिया होगी। साथ ही स्टूडेंट प्रदर्शनकारियों से जुड़ी FIR पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश भी अहम रहेगा।










