Tamil Nadu News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के परिसीमन को लेकर दिए गए ताजा बयान के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है। पहले उनकी सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बनाए रखने की मांग कर रही थी, लेकिन अब विजय ने संसद में राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व के प्रतिशत को सुरक्षित रखने की मांग की है।
विजय का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मामल्लपुरम में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान आया। इसके बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि क्या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख बदल लिया है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद क्या बोले सीएम विजय?
गुरुवार को मामल्लपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से स्पष्ट गारंटी देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन में किसी राज्य की सफलता के कारण संसद में उस राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
विजय ने यह भी कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक समाप्त होने वाली है और परिसीमन विधेयक 2026 पर विचार किया जा रहा है।
उनके अनुसार, दक्षिणी राज्यों की चिंता यह है कि अगर मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया, तो संसद में उनकी मौजूदा राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है।
पहले क्या था विजय सरकार का रुख?
12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय की ओर से परिसीमन के संबंध में प्रस्ताव पेश किया गया था।
इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर राज्यों की आबादी के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन किया जाता है, तो दक्षिणी राज्यों से चुने जाने वाले सांसदों की संख्या प्रभावित होने की आशंका है।
इसी वजह से प्रस्ताव में लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या 543 पर बनाए रखने की मांग की गई थी।
अब विजय ने मौजूदा सीटों की संख्या को सीधे बनाए रखने के बजाय संसद में हर राज्य के मौजूदा प्रतिनिधित्व के प्रतिशत को सुरक्षित रखने की बात कही है। इसी बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में उनके रुख पर सवाल उठ रहे हैं।
कर्नाटक के सीएम ने क्या मांग की?
परिसीमन के मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का रुख भी सामने आया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या बरकरार रखी जाए।
इससे दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर साझा चिंता का संकेत मिलता है।
तमिलनाडु के दूसरे राजनीतिक दल क्या कह रहे हैं?
तमिलनाडु की राजनीति में विजय के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा सीटों के परिसीमन, तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव और कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव में एक समान रुख है।
उनके मुताबिक लोकसभा की कुल 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस मौजूदा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने के पक्ष में है।
टीटीवी दिनाकरन ने विजय पर साधा निशाना
एएमएमके नेता टीटीवी दिनाकरन ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के कुछ ही समय बाद विजय के ताजा बयान पर सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा कि क्या टीवीके सरकार संसद के परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख बदल रही है।
दिनाकरन ने कहा कि गठबंधन के सांसदों की बैठक बुलाने और विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के कुछ सप्ताह बाद विजय की नई टिप्पणियां विरोधाभास पैदा करती हैं।
डीएमके ने भी उठाए सवाल
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने भी मुख्यमंत्री विजय के रुख पर सवाल उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके का रुख स्पष्ट है और पार्टी निष्पक्ष परिसीमन चाहती है, लेकिन अमित शाह के सामने मुख्यमंत्री विजय का रुख बदल जाता है।
इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन का मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्या विजय ने वास्तव में अपना रुख बदला है?
इस सवाल पर तमिलनाडु सरकार की ओर से अलग जवाब दिया गया है।
तमिलनाडु के कानून मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद की 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों को स्थायी रखने की मांग में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इसलिए मुख्यमंत्री के ताजा बयान को लेकर राजनीतिक दलों और सरकार के बीच व्याख्या का अंतर दिखाई दे रहा है।
दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से क्या चिंता है?
तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों की मुख्य चिंता जनसंख्या आधारित परिसीमन से जुड़ी है।
इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने परिवार नियोजन, मानव विकास और आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि इन उपलब्धियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सफलता के रूप में देखा जाना चाहिए और इसके कारण राज्यों के संसद में प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होनी चाहिए।
यही वजह है कि दक्षिणी राज्यों के कई राजनीतिक दल लोकसभा सीटों में संभावित बदलाव को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
सर्वदलीय बैठक में भी हुई थी चर्चा
8 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में सांसदों की सर्वदलीय बैठक हुई थी। इस बैठक में परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की गई और विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का फैसला लिया गया था।
इसके बाद 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में संबंधित प्रस्ताव पेश किया गया।
अब अमित शाह की अध्यक्षता वाली दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय के बयान ने इस बहस को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।












