Tata Group News: टाटा ग्रुप में अगले चेयरमैन को लेकर हलचल तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश की अनौपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन फरवरी में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने बुधवार को मुंबई के ताज वेलिंगटन म्यूज रेजिडेंस में HDFC के पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख से मुलाकात की। बैठक में टाटा ट्रस्ट के एक अन्य ट्रस्टी भी मौजूद थे।
टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश क्यों शुरू हुई?
टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने फरवरी में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके बाद टाटा ग्रुप में उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
टाटा संस करीब 185 अरब डॉलर के टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसलिए इसके अगले चेयरमैन का चयन ग्रुप के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माना जा रहा है कि प्रस्तावित सक्सेशन कमिटी टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन में अहम भूमिका निभाएगी।
दीपक पारेख से नोएल टाटा की मुलाकात क्यों अहम?
नोएल टाटा और दीपक पारेख की मुलाकात को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पारेख का टाटा ग्रुप के साथ पुराना कारोबारी संबंध रहा है।
दीपक पारेख HDFC ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रहे हैं। HDFC ग्रुप के टाटा समूह के साथ महत्वपूर्ण व्यावसायिक संबंध रहे हैं।
पारेख टाटा ग्रुप की प्रमुख हॉस्पिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी के बोर्ड में भी रह चुके हैं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि दीपक पारेख को उत्तराधिकार समिति में कोई औपचारिक भूमिका देने का प्रस्ताव दिया गया है या नहीं।
टाटा संस की AGM में भी उठा था उत्तराधिकार का मुद्दा
इससे पहले टाटा संस की AGM को कोरम पूरा नहीं होने के कारण पहली बार स्थगित करना पड़ा था।
माना जा रहा है कि बैठक में प्रस्तावित सक्सेशन कमिटी पर चर्चा होनी थी। यही समिति टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
टाटा संस के नियमों के अनुसार उत्तराधिकार समिति का गठन जरूरी है।
कैसे बनेगी टाटा संस की सक्सेशन कमिटी?
टाटा संस के नियमों के मुताबिक उत्तराधिकार समिति में कुल पांच सदस्य होने चाहिए।
इनमें:
- तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा नामित किया जाना है।
- दो सदस्यों का चयन टाटा संस बोर्ड द्वारा किया जाना है।
- बोर्ड के सदस्यों में एक मौजूदा टाटा संस डायरेक्टर हो सकता है।
- दूसरा सदस्य बाहरी स्वतंत्र सदस्य हो सकता है।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।
उत्तराधिकार प्रक्रिया में क्या है पेच?
टाटा संस के चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक पेच भी सामने आ रहा है।
नियमों के अनुसार ट्रस्ट द्वारा नामित तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से नामित किया जाना चाहिए।
लेकिन महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के फैसले लेने पर रोक लगा रखी है।
ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि उत्तराधिकार समिति की औपचारिक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
पहले भी अपनाया जा चुका है सर्च कमिटी मॉडल
टाटा संस में नए चेयरमैन के चयन के लिए सर्च कमिटी मॉडल पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है।
साल 2012 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर साइरस मिस्त्री को इसी तरह की प्रक्रिया के जरिए चुना गया था।
इसके बाद 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद पांच सदस्यों की एक नई समिति बनाई गई थी।
इस समिति में रतन टाटा, ट्रस्ट के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन, ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अमित चंद्र, टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर रोनेन सेन और प्रोफेसर कुमार भट्टाचार्य शामिल थे।
इसी समिति ने एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए चुना था।
दीपक पारेख का टाटा-मिस्त्री विवाद से भी रहा है संबंध
दीपक पारेख टाटा ग्रुप के लिए नए नाम नहीं हैं। उनका समूह के साथ पुराना संबंध रहा है।
वह उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्होंने रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच विवाद के दौरान सार्वजनिक रूप से मिस्त्री का समर्थन किया था।
साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था।
यही वजह है कि टाटा संस की मौजूदा उत्तराधिकार प्रक्रिया में पारेख की संभावित भूमिका को लेकर भी बाजार और कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—कौन बनेगा टाटा संस का अगला चेयरमैन?
फिलहाल नए चेयरमैन के नाम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नोएल टाटा की दीपक पारेख से मुलाकात और सक्सेशन कमिटी को लेकर चल रही प्रक्रिया से संकेत मिलता है कि टाटा ग्रुप ने उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर शुरुआती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
हालांकि, अंतिम चयन किस नाम पर होगा और उत्तराधिकार समिति में कौन-कौन शामिल होगा, इस बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।












