नई दिल्ली: साल 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बन गया। शुरुआत सोशल मीडिया अभियान से हुई, लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन सड़कों तक पहुंच गया। NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्र और युवा जंतर-मंतर पर जुटे।
आंदोलन को उस समय और अधिक बल मिला जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए। कई सप्ताह तक धरना, भूख हड़ताल और संसद मार्च के बाद आखिरकार सरकार के साथ बातचीत हुई और 25 जुलाई 2026 को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।
आइए जानते हैं CJP आंदोलन की पूरी टाइमलाइन।
CJP क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक युवा-आधारित सामाजिक-राजनीतिक अभियान के रूप में सामने आई। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना था।
कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर इस अभियान को लाखों लोगों का समर्थन मिलने लगा। हालांकि बीच में पार्टी का सोशल मीडिया अकाउंट निलंबित भी हुआ, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप के बाद इसे दोबारा बहाल कर दिया गया।
CJP आंदोलन की पूरी टाइमलाइन
16 मई 2026
अभिजीत दीपके की बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी के बाद CJP के गठन की घोषणा हुई।
21 मई 2026
कुछ ही दिनों में CJP के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए।
21 मई 2026
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए CJP का X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट निलंबित कर दिया गया। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर अकाउंट बहाल हुआ।
1 जून 2026
अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत लौटे और दिल्ली में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।
2 जून 2026
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलन से जुड़ने की घोषणा की।
6 जून 2026
दिल्ली पुलिस की अनुमति से एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। इस दौरान NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी।
20 जून 2026
जंतर-मंतर पर छात्र और CJP समर्थक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
28 जून 2026
सोनम वांगचुक ने आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।
9 जुलाई 2026
CJP ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च का ऐलान किया।
18 जुलाई 2026
पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।
20 जुलाई 2026
संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए।
इसी दिन CJP प्रतिनिधियों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के बीच पहली औपचारिक बातचीत भी हुई, लेकिन आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।
21 जुलाई 2026
दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
23 जुलाई 2026
करीब 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त किया।
24 जुलाई 2026
वीपी हाउस स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत बैठक हुई। सरकार ने CJP की तीन प्रमुख मांगों में से दो मांगें मानने का आश्वासन दिया, जबकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अगले दिन तक निर्णय का समय मांगा गया।
25 जुलाई 2026
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार और CJP के बीच अंतिम बैठक हुई। सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद CJP ने आधिकारिक रूप से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
CJP आंदोलन की प्रमुख मांगें
- NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की वापसी
- प्रभावित छात्रों के लिए उचित मुआवजा
- शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार
आंदोलन क्यों बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय?
इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसकी शुरुआत सोशल मीडिया से हुई, लेकिन बाद में यह देशव्यापी जनआंदोलन में बदल गया। बड़ी संख्या में युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने इसमें भाग लिया।
सोनम वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को और अधिक राष्ट्रीय पहचान मिली। जंतर-मंतर का धरना, संसद मार्च और सरकार के साथ कई दौर की वार्ता लगातार चर्चा में रही।
CJP आंदोलन का परिणाम
करीब दो महीने तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी। सरकार ने प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।












