मक्का: यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद मक्का में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को खतरे की जानकारी दी गई और ऊंची इमारतों से दूर रहने की अपील की गई। कुछ समय बाद अधिकारियों ने खतरा टलने की जानकारी दी।
मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी सुरक्षा चेतावनी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर मक्का की संवेदनशीलता को देखते हुए इस अलर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मक्का में क्यों जारी हुआ इमरजेंसी अलर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब के नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म ने मक्का में अलर्ट जारी किया।
लोगों से ऊंची इमारतों से दूर रहने और खतरा टलने तक सावधानी बरतने को कहा गया। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि तत्काल खतरा टल गया है।
जेद्दा और ताइफ में भी जारी हुआ अलर्ट
मक्का के अलावा जेद्दा और ताइफ में भी मंगलवार सुबह इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। अधिकारियों ने कुछ समय बाद इन अलर्ट को वापस ले लिया।
सऊदी प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।
लोगों को क्या सावधानी बरतने को कहा गया?
मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी चेतावनी के दौरान लोगों को भीड़ और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई।
इसके अलावा लोगों से घर के अंदर रहने और खिड़की, बालकनी, छत तथा कांच वाली जगहों से दूर रहने को कहा गया। अगर कोई व्यक्ति बाहर है, तो उसे नजदीकी इमारत में जाने या किसी मजबूत संरचना की आड़ लेने की सलाह दी गई।
अधिकारियों ने लोगों से किसी घटना की फोटो या वीडियो बनाने से भी बचने की अपील की।
2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल
मक्का की सुरक्षा को लेकर चिंता नई नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 27 जुलाई 2017 को हूती विद्रोहियों ने मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, उस मिसाइल को मक्का से लगभग 69 किलोमीटर दूर अल-वसिलिया इलाके में नष्ट कर दिया गया था।
मक्का की सुरक्षा कितनी मजबूत है?
मक्का दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण इस्लामिक तीर्थस्थलों में से एक है। यहां मस्जिद अल-हरम और काबा स्थित हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हज और उमरा के लिए पहुंचते हैं।
इसी वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था में एयर डिफेंस, रडार निगरानी, मोबाइल अलर्ट और पुलिस-सिविल डिफेंस जैसी कई व्यवस्थाएं शामिल हैं।
एयर डिफेंस सिस्टम
हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए सऊदी अरब मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों को हवा में ही रोकने की कोशिश करता है। 2017 में मक्का की ओर आने वाली मिसाइल को इंटरसेप्ट किए जाने का दावा भी सामने आया था।
रडार और निगरानी
सऊदी अरब का हवाई क्षेत्र लगातार निगरानी में रखा जाता है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित ड्रोन या मिसाइल खतरे का समय रहते पता लगाना है।
मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट
सऊदी अरब का नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म मोबाइल नेटवर्क के जरिए नागरिकों तक खतरे की जानकारी पहुंचाता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम 2022 में लॉन्च किया गया था।
पुलिस और सिविल डिफेंस
किसी हमले या आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना, रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना, आग पर नियंत्रण और भीड़ को संभालना पुलिस तथा सिविल डिफेंस की जिम्मेदारी होती है।
हूती हमलों में कितने लोग घायल हुए?
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में हूती हमलों के दौरान कम से कम 86 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
सोमवार को खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमलों की बात कही गई थी। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 13 नागरिक घायल हुए थे।
इससे पहले भी सऊदी अरब के कई शहरों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।
यमन में क्यों बढ़ रहा है तनाव?
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव का संबंध यमन में जारी संघर्ष से है।
रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोहियों का आरोप है कि सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है। दूसरी तरफ यमन के विभिन्न हिस्सों में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच संघर्ष जारी है।
इस संघर्ष का असर अब लाल सागर और उसके आसपास के रणनीतिक क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है।
लाल सागर में हूतियों का बढ़ता कब्जा
रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है। सोमवार को ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जे का भी दावा किया गया।
ये द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित बताए गए हैं।
यमन में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाकों की मौत का दावा
हूतियों के खिलाफ संघर्ष में पिछले चार सप्ताह के दौरान सरकार समर्थित 500 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के मुताबिक इसी अवधि में होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार हूतियों की ओर से इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
पाकिस्तान ने सऊदी की मदद से इनकार किया
हूती हमलों के बीच सऊदी अरब ने अपने सहयोगी देशों से मदद मांगी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद के लिए सेना भेजने से इनकार किया।
पाकिस्तान का कहना बताया गया है कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी।
Mecca Emergency Alert: क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
मक्का में इमरजेंसी अलर्ट जारी होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक अलर्ट के कुछ समय बाद खतरा टलने की जानकारी दी गई। इसलिए इस घटना को सुरक्षा चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में देखना चाहिए, न कि मक्का पर सीधे मिसाइल गिरने की पुष्टि के रूप में।










