UPI MDR Charge: भारत में UPI Payment को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ कारोबारी UPI लेनदेन पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू किए जाने को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे ‘UPI टैक्स’ बताया है। दूसरी ओर, सरकार और बीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने UPI के लिए लंबे समय में टिकाऊ आय मॉडल की जरूरत बताई थी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समिति की बैठक में मौजूद कांग्रेस के पांच सांसदों ने इस सिफारिश पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। हालांकि, इस दावे पर कांग्रेस की ओर से उस समय तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
UPI MDR Charge को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI पर शुल्क को लेकर बहस तब तेज हुई, जब ₹2,000 से ज्यादा के पात्र कारोबारी लेनदेन पर MDR लागू करने की बात सामने आई।
राहुल गांधी ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे ‘UPI टैक्स’ बताया और सरकार पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
इसके जवाब में सरकारी सूत्रों और बीजेपी ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। उनका कहना है कि समिति पहले ही UPI के लिए एक टिकाऊ वित्तीय मॉडल की जरूरत पर जोर दे चुकी थी।
सरकार ने कांग्रेस सांसदों को लेकर क्या दावा किया?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 12 अगस्त को वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया था। उस बैठक में कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे।
इनमें:
- पी. चिदंबरम
- मनीष तिवारी
- गौरव गोगोई
- किशोरी लाल
- के. गोपीनाथ
शामिल बताए गए हैं।
सरकारी सूत्रों का दावा है कि बैठक में मौजूद कांग्रेस सांसदों ने समिति की सिफारिशों पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में कांग्रेस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। इसलिए इस हिस्से को राजनीतिक आरोप और सरकारी सूत्रों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
संसदीय समिति ने MDR को लेकर क्या कहा?
सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए टिकाऊ आय मॉडल तैयार करने की जरूरत बताई थी।
समिति के अनुसार, अधिक मूल्य वाले UPI लेनदेन के लिए अलग-अलग स्तर का MDR लागू करने से संबंधित कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
रिपोर्ट में इस व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू करने की बात भी कही गई थी।
यानी समिति का मुख्य फोकस UPI व्यवस्था के लिए ऐसा वित्तीय ढांचा तैयार करना था, जिससे लंबे समय तक डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत रखा जा सके।
Zero MDR मॉडल पर भी उठे सवाल
भारत में UPI के लिए लंबे समय से Zero MDR Model लागू रहा है। इसका मतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में कारोबारी से UPI भुगतान स्वीकार करने पर MDR नहीं लिया जाता।
लेकिन इस मॉडल को लंबे समय तक चलाने की आर्थिक लागत को लेकर संसदीय समिति ने चिंता जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए UPI प्रोत्साहन के लिए करीब ₹2,000 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया था, जबकि उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत करीब ₹20,700 करोड़ बताई गई।
इस अंतर को देखते हुए समिति ने UPI के लिए ज्यादा टिकाऊ आय मॉडल की जरूरत पर जोर दिया।
साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
UPI नेटवर्क को लगातार सुरक्षित बनाए रखना बड़ी चुनौती है। डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड रोकने, नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है।
समिति के मुताबिक, अगर भुगतान कंपनियां लंबे समय तक सरकारी सहायता पर निर्भर रहती हैं, तो भविष्य में साइबर सुरक्षा और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से समिति ने आत्मनिर्भर और टिकाऊ आय मॉडल की जरूरत बताई थी।
छोटे दुकानदारों के लिए क्या है राहत?
नए UPI शुल्क ढांचे में छोटे कारोबारियों के लिए राहत का प्रावधान भी बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को MDR से बाहर रखा जाएगा।
इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और कम मूल्य के डिजिटल लेनदेन को अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव से बचाना बताया गया है।
यह प्रावधान खास तौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
15 अक्टूबर 2026 से क्या बदलेगा?
रिपोर्ट में बताए गए नए स्ट्रक्चर के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के पात्र कारोबारी UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा।
इस शुल्क की खास बातें:
| नियम | विवरण |
|---|---|
| MDR लागू होने की तारीख | 15 अक्टूबर 2026 |
| सीमा | ₹2,000 से ज्यादा के पात्र कारोबारी लेनदेन |
| MDR | 0.4% |
| शुल्क किससे लिया जाएगा | व्यापारी |
| ग्राहक पर सीधा शुल्क | नहीं |
| ₹75,000+ लेनदेन पर अधिकतम MDR | ₹300 |
| P2P UPI Payment | MDR लागू नहीं |
| छोटे व्यापारी | ₹1 लाख तक मासिक QR प्राप्ति पर राहत |
₹75,000 से ज्यादा के UPI Payment पर कितना शुल्क?
नए स्ट्रक्चर में ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
इसका मतलब है कि तय सीमा से ऊपर लेनदेन का शुल्क प्रतिशत के हिसाब से बढ़ते हुए एक निश्चित अधिकतम राशि तक सीमित रहेगा।
हालांकि, यह शुल्क ग्राहक के बजाय पात्र कारोबारी से लिया जाना प्रस्तावित है।
क्या आम UPI यूजर को पैसा देना होगा?
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, नए MDR का बोझ सीधे ग्राहक पर डालने की बात नहीं कही गई है।
यह शुल्क पात्र Merchant UPI Transactions पर लागू होगा। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI Transactions को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
इसलिए आम व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पर यह MDR लागू नहीं होगा।
राहुल गांधी ने UPI शुल्क पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने नए शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए इसे ‘UPI टैक्स’ बताया है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस कदम का फायदा अमेरिका को मिल सकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में काम कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।
सरकार का क्या जवाब है?
सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित MDR ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के लिए लंबे समय तक टिकाऊ वित्तीय ढांचा तैयार करना है।
सरकार का यह भी तर्क है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा, तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क में लगातार निवेश जरूरी है।
UPI MDR Charge: असली बहस क्या है?
UPI MDR को लेकर विवाद सिर्फ शुल्क लगाने या नहीं लगाने तक सीमित नहीं है।
एक तरफ सवाल है कि क्या UPI को Zero MDR मॉडल पर लंबे समय तक चलाया जा सकता है। दूसरी तरफ चिंता यह है कि अगर व्यापारियों पर शुल्क बढ़ता है तो छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान की आदत पर इसका क्या असर होगा।
यही वजह है कि सरकार की वित्तीय स्थिरता की दलील और विपक्ष की ‘UPI टैक्स’ वाली आलोचना के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।










