नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के साथी असगर अली वोरा से जुड़ा जमीन विवाद चर्चा में है। 81 वर्षीय वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी जमीन से जुड़े विवाद में हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले में बैठक की और भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने की बात कही। साथ ही निर्माण की मिली अनुमति को भी सरेंडर करने की जानकारी सामने आई है।
क्या है पीएम मोदी के स्कूलमेट का जमीन विवाद?
मीरा रोड निवासी असगर अली वोरा ने आरोप लगाया था कि भयंदर में उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है। वोरा ने बताया कि उन्होंने 1989 में भयंदर ईस्ट के नवघर में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी।
उनके अनुसार, वर्ष 2011 में इस प्लॉट पर स्वयं बिल्डर्स और नरेंद्र मेहता की सेवन-इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने कब्जा कर लिया। वोरा का कहना था कि वह करीब 15 वर्षों से अलग-अलग सरकारी अधिकारियों के सामने इस मामले को उठाते रहे हैं।
8 सितंबर को पीएम मोदी से की मुलाकात
असगर अली वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने अपनी जमीन से जुड़े विवाद की जानकारी प्रधानमंत्री को दी और मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
वोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद सरकारी स्तर पर इस मामले को लेकर कार्रवाई शुरू हुई।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अधिकारियों ने बुलाई बैठक
मुलाकात के बाद मंगलवार को मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने बुलाई थी।
बैठक में असगर अली वोरा के साथ नरेंद्र मेहता, मीरा-भयंदर नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी शामिल हुए।
BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने क्या कहा?
बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने कहा कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं।
इसके अलावा, जमीन पर मिली निर्माण अनुमति को भी सरेंडर करने की बात कही गई। पत्र में यह भी बताया गया कि मेहता के अनुसार जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडीस से खरीदी गई थी।
वोरा के खिलाफ शिकायत भी वापस लेने की बात
जमीन विवाद के बीच नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को भी एक अलग पत्र लिखा। इसमें उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही।
रिपोर्ट के मुताबिक, मेहता ने इसका कारण दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता बताया।
असगर अली वोरा कौन हैं?
असगर अली वोरा मीरा रोड के रहने वाले 81 वर्षीय व्यक्ति हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात के वडनगर स्थित बी एन स्कूल में पढ़ाई की थी। यही पुराना स्कूल संबंध इस पूरे मामले को व्यापक सार्वजनिक चर्चा में लेकर आया।
15 साल से चल रहा था जमीन विवाद
वोरा का कहना है कि वह लंबे समय से अपनी जमीन से जुड़े विवाद को लेकर सरकारी अधिकारियों से संपर्क कर रहे थे। उनके अनुसार, करीब 15 वर्षों से मामला अलग-अलग स्तरों पर उठाया जाता रहा।
अब पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अधिकारियों की बैठक और विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने की घोषणा से मामले में नया मोड़ आया है।
क्या जमीन का विवाद पूरी तरह खत्म हो गया?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मेहता ने जमीन का कब्जा छोड़ने, निर्माण अनुमति सरेंडर करने और वोरा के खिलाफ अपनी शिकायत वापस लेने की बात कही है।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में जमीन के कानूनी स्वामित्व या सभी कानूनी प्रक्रियाओं के अंतिम रूप से पूरा होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है। इसलिए इसे विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम कहना अधिक उचित होगा।
PM Modi Schoolmate Land Dispute: बड़ी बातें
- असगर अली वोरा की उम्र 81 वर्ष बताई गई है।
- उन्होंने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात की।
- वोरा के अनुसार, उन्होंने 1989 में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी।
- उन्होंने 2011 में जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया।
- विवाद को लेकर करीब 15 वर्षों से अधिकारियों से संपर्क करने की बात कही।
- पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अधिकारियों ने बैठक की।
- नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने की बात कही।
- निर्माण अनुमति सरेंडर करने की जानकारी दी गई।
- वोरा के खिलाफ पिछली शिकायत वापस लेने की बात भी कही गई।












