लोकसभा के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक बयान के बाद संसद में असंसदीय शब्द (Unparliamentary Words) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उनके भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘इडियट (Idiot)’ और ‘अंधभक्त (Andhbhakt)’ जैसे शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने (Expunge) का निर्देश दिया।
इस घटनाक्रम के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठे—क्या संसद में कुछ शब्द हमेशा के लिए प्रतिबंधित होते हैं? क्या असंसदीय शब्दों की कोई सूची होती है? और आखिर किसी शब्द को रिकॉर्ड से हटाने का फैसला कौन करता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
राहुल गांधी के बयान पर क्यों शुरू हुआ विवाद?
29 जुलाई 2026 को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (पेपर लीक) से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने लोगों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए Students, Idiots और Andhbhakts जैसे शब्दों का उल्लेख किया।
सत्ता पक्ष ने इन शब्दों को संसदीय गरिमा के विरुद्ध बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इस प्रकार की भाषा संसद की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
संसद में असंसदीय शब्द क्या होते हैं?
भारतीय संसद में सांसदों को अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता होती है, लेकिन यह स्वतंत्रता संसदीय नियमों और मर्यादाओं के दायरे में होती है।
यदि कोई सांसद ऐसा शब्द, टिप्पणी या आरोप लगाता है जिसे—
- अपमानजनक माना जाए,
- अशोभनीय हो,
- मानहानिकारक हो,
- अभद्र या अश्लील हो,
- किसी व्यक्ति या संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला हो,
तो उसे असंसदीय शब्द (Unparliamentary Expression) माना जा सकता है।
हालांकि, किसी शब्द को असंसदीय घोषित करने का अंतिम अधिकार केवल पीठासीन अधिकारी यानी लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास होता है।
क्या संसद में असंसदीय शब्दों की कोई स्थायी सूची होती है?
यह सबसे बड़ा भ्रम है कि संसद में कुछ शब्द हमेशा के लिए बैन होते हैं।
असलियत यह है कि संसद में किसी भी शब्द की स्थायी प्रतिबंधित सूची (Permanent Ban List) नहीं होती।
लोकसभा सचिवालय समय-समय पर “Unparliamentary Expressions” नाम से एक संदर्भ पुस्तक प्रकाशित करता है। इसमें उन शब्दों और वाक्यांशों का संकलन होता है जिन्हें पहले विभिन्न अवसरों पर संसद या विधानसभाओं की कार्यवाही से हटाया गया था।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वही शब्द हर परिस्थिति में असंसदीय माने जाएंगे।
संदर्भ सबसे महत्वपूर्ण होता है
एक ही शब्द—
- किसी स्थिति में स्वीकार्य हो सकता है।
- दूसरी परिस्थिति में असंसदीय माना जा सकता है।
इसीलिए हर मामले में निर्णय परिस्थितियों और संदर्भ को देखकर लिया जाता है।
संसद की कार्यवाही से शब्द हटाने (Expunge) का क्या मतलब होता है?
यदि लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति को लगता है कि किसी सदस्य की टिप्पणी संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है, तो वे उस हिस्से को Expunge करने का आदेश दे सकते हैं।
इसका अर्थ है कि—
- वह टिप्पणी संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रहेगी।
- भविष्य में आधिकारिक कार्यवाही में उसका उल्लेख नहीं किया जाएगा।
- हालांकि, मीडिया रिपोर्ट, वीडियो रिकॉर्डिंग या लाइव प्रसारण में वह बयान देखा या सुना जा सकता है।
सरकार ने राहुल गांधी के बयान पर क्या कहा?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि संसद के भीतर इस प्रकार की भाषा का प्रयोग संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी मांग की।
इस पर सदन में तीखी बहस हुई और कुछ समय तक हंगामा भी जारी रहा।
राहुल गांधी ने अपनी सफाई में क्या कहा?
विवाद बढ़ने पर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संबंधित शब्द किसी सांसद के लिए नहीं बल्कि अपने भाषण के संदर्भ में इस्तेमाल किए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन शब्दों को आपत्तिजनक माना जा रहा है तो वे इनके स्थान पर दूसरा शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने क्या फैसला सुनाया?
विवाद बढ़ने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
इसका अर्थ है कि ये शब्द अब लोकसभा की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं माने जाएंगे।
संसद में किन परिस्थितियों में शब्द हटाए जाते हैं?
सामान्य तौर पर निम्न प्रकार की टिप्पणियों को हटाया जा सकता है—
- व्यक्तिगत आरोप
- अपमानजनक भाषा
- अशोभनीय टिप्पणी
- मानहानिकारक बयान
- अश्लील या अभद्र शब्द
- बिना प्रमाण लगाए गए गंभीर आरोप
- संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कथन
संसद में बोलने की स्वतंत्रता और उसकी सीमाएं
भारतीय संविधान सांसदों को संसद के भीतर विशेषाधिकार प्रदान करता है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है।
संसद की कार्यवाही गरिमापूर्ण बनी रहे, इसलिए अध्यक्ष या सभापति को यह अधिकार दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे किसी भी टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दे सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
संसद में असंसदीय शब्द क्या होते हैं?
ऐसे शब्द या टिप्पणियां जिन्हें अपमानजनक, अशोभनीय, मानहानिकारक या संसदीय गरिमा के विरुद्ध माना जाए, उन्हें असंसदीय शब्द कहा जा सकता है।
क्या संसद में कुछ शब्द हमेशा के लिए प्रतिबंधित होते हैं?
नहीं। संसद में किसी भी शब्द की स्थायी प्रतिबंधित सूची नहीं होती। हर मामले में संदर्भ के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
संसद की कार्यवाही से शब्द हटाने का क्या अर्थ है?
जब किसी टिप्पणी को Expunge किया जाता है, तो वह संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रहती।
राहुल गांधी के किस बयान पर विवाद हुआ?
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई।
अंतिम निर्णय कौन लेता है?
लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति यह तय करते हैं कि कोई शब्द रिकॉर्ड में रहेगा या हटाया जाएगा।












