भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश के पहले निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल Vikram-1 ने सफलतापूर्वक छह पेलोड, जिनमें दो उपग्रह भी शामिल हैं, को 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित कर दिया। इस सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Skyroot Aerospace की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने लाइव देखा लॉन्च
Vikram-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भारत डाका से फोन पर बातचीत की।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूरा लॉन्च कार्यक्रम लाइव देखा और टीम की मेहनत से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इतनी युवा टीम का यह कारनामा देश के लाखों युवाओं को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
‘मिशन आगमन’ बना निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का नया अध्याय
Vikram-1 का प्रक्षेपण ‘मिशन आगमन’ के तहत श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया।
यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने अपना ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विकसित कर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है।
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी मिसाल
प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया।
Skyroot Aerospace के अनुसार Vikram-1 को पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। इससे यह साबित होता है कि भारतीय कंपनियां अब अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
‘वंदे मातरम्’ भी पहुंचा अंतरिक्ष
इस मिशन की एक खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजा गया ‘वंदे मातरम्’ लिखा विशेष पोस्टकार्ड भी Vikram-1 के साथ अंतरिक्ष में पहुंचा।
यह मिशन ऐसे समय पूरा हुआ है जब देश ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। Skyroot की टीम ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनका संदेश सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच चुका है।
Skyroot CEO ने कहा- यह पूरे भारत की जीत
Skyroot Aerospace के CEO पवन कुमार चंदाना ने कहा कि यह केवल उनकी कंपनी की नहीं, बल्कि पूरे भारत और वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग के लिए ऐतिहासिक क्षण है।
उन्होंने कहा कि Vikram-1 का प्रत्येक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय इंजीनियरों द्वारा भारत में तैयार किया गया है, जो देश की तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने साबित करता है।
Vikram-1 की खास खूबियां
Vikram-1 को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विकसित किया गया है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं:
- तीन चरणों वाला सॉलिड फ्यूल लॉन्च व्हीकल
- रीस्टार्ट होने वाला Orbit Adjustment Module (OAM)
- एडवांस कार्बन-कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर
- एक साथ कई उपग्रहों को तैनात करने की क्षमता
- लो-अर्थ ऑर्बिट में लगभग 350 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता
- सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में लगभग 260 किलोग्राम पेलोड भेजने की क्षमता
Vikram-S मिशन से मिली थी सफलता की नींव
Vikram-1 में इस्तेमाल की गई कई तकनीकों का परीक्षण वर्ष 2022 में लॉन्च किए गए Vikram-S मिशन के दौरान किया गया था।
इनमें शामिल हैं:
- प्रोपल्शन सिस्टम
- एवियोनिक्स
- थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम
- कार्बन-कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर
इन्हीं सफल परीक्षणों के आधार पर Vikram-1 का विकास किया गया।
भारत के लिए क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण?
Vikram-1 की सफलता केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष भविष्य की नई शुरुआत है।
इस मिशन से:
- भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र मजबूत होगा।
- छोटे उपग्रह लॉन्च करने का नया बाजार खुलेगा।
- वैश्विक कंपनियां भारतीय लॉन्च सेवाओं की ओर आकर्षित होंगी।
- भारतीय स्टार्टअप्स को नई पहचान मिलेगी।
- ISRO और निजी कंपनियों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
भारत के स्पेस सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
दुनियाभर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में Vikram-1 जैसे लॉन्च व्हीकल भारत को वैश्विक कमर्शियल स्पेस मार्केट में मजबूत स्थिति दिला सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत निजी स्पेस लॉन्च सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन सकता है।










