विजेता दहिया को CJP ने प्रवक्ता पद से हटाया
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया को पद से हटाने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि दहिया का हालिया व्यवहार संगठन के मूल सिद्धांतों और आंदोलन की भावना के अनुरूप नहीं था। इसी कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रवक्ता पद सहित सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
यह फैसला उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर विजेता दहिया के कुछ वीडियो तेजी से वायरल होने लगे और उन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया।
CJP ने क्या कहा?
पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी बयान में कहा कि जब संगठन के कार्यकर्ता और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उसी दौरान सामने आए कुछ वीडियो बेहद असंवेदनशील प्रतीत हुए।
CJP के अनुसार, ऐसा व्यवहार आंदोलन की भावना और संगठन के मूल्यों के खिलाफ है। इसलिए पार्टी नेतृत्व ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटा दिया।
वायरल वीडियो से कैसे शुरू हुआ विवाद?
20 जुलाई को आयोजित “संसद चलो मार्च” के दौरान हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें विजेता दहिया कथित रूप से प्रदर्शन स्थल छोड़कर बर्गर खाते हुए दिखाई दिए।
इसके बाद एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें कुछ लोग उनसे आंदोलन को लेकर सवाल पूछते नजर आए। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया।
विजेता दहिया ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद विजेता दहिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद वह घर चले गए थे। उनके अनुसार, वह नहाने के बाद भोजन करने निकले थे और वीडियो उसी दौरान रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि, उनकी इस सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर आलोचना जारी रही और मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने भी उठाए सवाल
शिवसेना (UBT) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर विजेता दहिया के आचरण को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि वह संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, तो क्या उन्होंने वास्तव में प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लिया था?
उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
विजेता दहिया को हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने पार्टी के फैसले को अनुशासन बनाए रखने की दिशा में सही कदम बताया, जबकि कुछ ने पूरे विवाद पर अलग-अलग राय व्यक्त की।












