सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में जन्माष्टमी के मौके पर ग्रामसभा की जमीन पर मूर्ति स्थापना और भंडारे के आयोजन को लेकर विवाद सामने आया है। पलहीपुर गांव के महेदवा इलाके में हुए इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बनने की बात सामने आई है।
मामले को लेकर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गोरेलाल यादव उर्फ सुमंत यादव ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है सुल्तानपुर जन्माष्टमी विवाद?
जानकारी के अनुसार, कोतवाली नगर क्षेत्र के पलहीपुर गांव के महेदवा में जन्माष्टमी के अवसर पर मूर्ति स्थापना और भंडारे का आयोजन किया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के बाद विवाद की स्थिति पैदा हुई।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुमंत यादव का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई एकतरफा रही। उन्होंने दावा किया कि आयोजन के लिए तैयार की गई खाद्य सामग्री को हटाने या फेंकने का दबाव बनाया गया।
उनके मुताबिक, उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया था कि वर्षों से चले आ रहे आयोजन को पूरा करने के लिए कुछ समय दिया जाए। उनका कहना था कि इसके बाद प्रशासन जो फैसला करेगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
आयोजन के दौरान क्या हुआ?
बताया गया है कि ग्रामसभा की भूमि पर जन्माष्टमी का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान दूसरे पक्ष की आपत्ति के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू हुई।
स्थानीय पक्ष का आरोप है कि कार्रवाई से पहले पर्याप्त बातचीत या जांच नहीं की गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनने की बात कही गई है।
एक वीडियो सामने आने का भी दावा किया गया है, जिसमें आपत्तिजनक नारे और धार्मिक आयोजनों को लेकर कथित बयान सुनाई देने की बात कही गई है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं दी गई है।
अखिलेश यादव ने X पर उठाया मामला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को इस मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जन्माष्टमी के आयोजन में बाधा डालकर पूजा-अर्चना रोकने का प्रयास किया। अखिलेश यादव ने इसे गंभीर मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी की वजह से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद में मुख्य सवाल प्रशासन की कार्रवाई और ग्रामसभा की जमीन पर धार्मिक आयोजन को लेकर सामने आया है। स्थानीय प्रतिनिधि का कहना है कि आयोजन लंबे समय से होता रहा है और प्रशासन से कार्यक्रम पूरा करने के लिए समय मांगा गया था।
दूसरी ओर, उपलब्ध सामग्री में प्रशासन या दूसरे पक्ष का विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए विवाद से जुड़े सभी आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
मामले की जांच की मांग
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस विवाद को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने रखता है और ग्रामसभा की जमीन पर आयोजन को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट होती है।












