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Air India Flight 300 Feet नीचे आई: पायलट ड्रग टेस्ट में क्या मिला? जानिए DGCA के नियम

On: August 13, 2026 2:41 AM
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Air India Flight 300 feet नीचे
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Air India Flight News: एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट नीचे आने के मामले में पायलट की ड्रग जांच चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट की दूसरी ड्रग जांच पॉजिटिव आई है। हालांकि, इस मामले में आधिकारिक जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने का इंतजार किया जा रहा है।

यह घटना 4 अगस्त 2026 को हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एयरबस A320 विमान में 137 यात्री और आठ क्रू मेंबर सवार थे। घटना में 20 यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

मामले की जांच Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है। जांच में तकनीकी, ऑपरेशनल, मेडिकल और मानवीय पहलुओं से जुड़े सबूतों को देखा जा रहा है।

क्या हुआ था Air India की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में?

4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट अचानक हवा में करीब 300 फीट नीचे आ गई।

घटना के बाद विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पायलट की मेडिकल और ड्रग जांच समेत कई पहलुओं पर जांच शुरू की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने घटना के कारणों की जांच शुरू की।

इस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विमान के अचानक नीचे आने के पीछे तकनीकी समस्या थी, मौसम या संचालन से जुड़ा कोई कारण था, मानवीय गलती थी या फिर कोई अन्य वजह।

पायलट की ड्रग जांच क्यों महत्वपूर्ण है?

विमान उड़ाने वाले पायलट की मानसिक और शारीरिक स्थिति सीधे उड़ान सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसलिए गंभीर विमानन घटना के बाद साइकोएक्टिव पदार्थों के इस्तेमाल की जांच एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।

इस मामले में पायलट का पहला ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव आया था। इसका मतलब यह नहीं होता कि पायलट का ड्रग टेस्ट अंतिम रूप से पॉजिटिव साबित हो गया। यह शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम होता है।

ऐसे मामले में पुष्टि के लिए दूसरा टेस्ट किया जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इसी दूसरी जांच में पायलट का परिणाम पॉजिटिव आया।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जांच के नतीजे गोपनीय हैं और एयर इंडिया के प्रवक्ता ने पायलट की ड्रग जांच के परिणाम पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

पहली जांच में नॉन-नेगेटिव आने का क्या मतलब है?

ड्रग टेस्ट की प्रक्रिया में शुरुआती स्क्रीनिंग और पुष्टि जांच अलग-अलग चरण होते हैं।

पहली जांच में अगर किसी साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी के संकेत मिलते हैं तो परिणाम को नॉन-नेगेटिव कहा जाता है।

ऐसे परिणाम को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। इसके बाद सैंपल को पुष्टि के लिए विस्तृत लैब जांच से गुजरना होता है।

यही वजह है कि शुरुआती नॉन-नेगेटिव परिणाम के बाद संबंधित कर्मचारी को ड्यूटी से हटाया जा सकता है और पुष्टि जांच की जाती है।

दूसरी बार ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने पर क्या होता है?

उपलब्ध DGCA नियमों के अनुसार, ड्रग टेस्ट में पहली बार पॉजिटिव पाए जाने पर कर्मचारी को नशा मुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

अगर कर्मचारी ड्रग टेस्ट कराने से इनकार करता है, तो इसे भी गंभीरता से लिया जाता है। पहली बार टेस्ट से इनकार करने पर कर्मचारी को ड्यूटी से हटाया जाता है और उसे निर्धारित समय के भीतर टेस्ट क्लियर करना होता है।

नियमों के अनुसार, दूसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस तीन साल तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव आने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

हालांकि, किसी व्यक्ति पर इन प्रावधानों को लागू करने से पहले संबंधित जांच और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

ड्रग टेस्ट में किन पदार्थों की जांच होती है?

DGCA की संबंधित गाइडलाइन के अनुसार, विमानन कर्मियों के यूरिन सैंपल में कई तरह के साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच की जाती है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • एम्फेटामाइन जैसे उत्तेजक पदार्थ
  • ओपिएट्स और उनके मेटाबोलाइट्स
  • टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल यानी कैनाबिस
  • कोकीन
  • बार्बिट्यूरेट्स
  • बेंजोडायजेपाइन

यह जांच केवल पायलटों तक सीमित नहीं है। सुरक्षा से जुड़े कई अन्य संवेदनशील विमानन पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों पर भी संबंधित नियम लागू होते हैं।

ड्रग टेस्ट का सैंपल कैसे लिया जाता है?

नियमों के अनुसार, कर्मचारी का यूरिन सैंपल दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग कंटेनरों में सुरक्षित रखा जाता है।

पहले कंटेनर के सैंपल से शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाता है।

अगर यह टेस्ट नॉन-नेगेटिव आता है, तो कर्मचारी को तुरंत सुरक्षा से जुड़ी ड्यूटी से हटाया जा सकता है। इसके बाद दूसरे कंटेनर में रखे सैंपल को पुष्टि के लिए लैब भेजा जाता है।

पुष्टि जांच में अधिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें Gas Chromatography/Mass Spectrometry (GC/MS) या Liquid Chromatography-Mass Spectrometry (LC/MS) जैसी तकनीकें शामिल हैं।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य शुरुआती स्क्रीनिंग परिणाम की पुष्टि करना होता है।

क्या साल में हर पायलट का ड्रग टेस्ट होता है?

उपलब्ध नियमों के अनुसार, फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों की सालाना 10 प्रतिशत रैंडम ड्रग जांच अनिवार्य है।

इसके अलावा, सुरक्षा से जुड़ी किसी घटना के बाद भी ड्रग टेस्ट किया जा सकता है।

यानी किसी विमान से जुड़ी गंभीर घटना होने पर संबंधित कर्मचारियों की ड्रग जांच करना जांच प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

अगर दवा की वजह से टेस्ट पॉजिटिव आए तो?

ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम आने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि व्यक्ति ने अवैध तरीके से नशीले पदार्थ का इस्तेमाल किया है।

कुछ वैध दवाओं में ऐसे रासायनिक पदार्थ या उनके घटक हो सकते हैं जिनसे किसी विशेष ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम आ सकता है।

इसीलिए पॉजिटिव परिणाम आने के बाद मेडिकल समीक्षा की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।

उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट में कोडीन वाली दर्द निवारक दवा का उल्लेख किया गया है, जिससे ओपिएट्स के लिए टेस्ट पॉजिटिव आ सकता है।

यही वजह है कि संबंधित मेडिकल रिव्यू ऑफिसर को यह देखना होता है कि परिणाम किसी वैध मेडिकल ट्रीटमेंट या अन्य वैध स्रोत से तो नहीं आया।

पायलटों को दवाओं को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

Airline Pilots Association of India की एडवाइजरी के मुताबिक, पायलटों को अपनी तरफ से दवाएं लेने से बचना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली कुछ सर्दी-जुकाम, खांसी, एलर्जी और नींद से जुड़ी दवाओं में ऐसे पदार्थ हो सकते हैं जिनकी विमानन कर्मियों के ड्रग टेस्ट में जांच होती है।

इसलिए पायलटों को कोई नई दवा शुरू करने से पहले अपने संगठन के मेडिकल अधिकारी से सलाह लेने की सलाह दी जाती है।

साथ ही उन्हें अपनी दवाओं की जानकारी, प्रिस्क्रिप्शन और दवा खरीदने की रसीदें सुरक्षित रखने को कहा गया है।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने क्या कहा?

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि सरकार इस घटना पर करीबी नजर रख रही है।

उन्होंने कहा कि अंतिम कार्रवाई का फैसला Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की जांच के निष्कर्षों के आधार पर किया जाएगा।

मंत्री के मुताबिक, सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और एयरलाइंस, नियामकों या किसी भी अन्य संबंधित पक्ष की ओर से सुरक्षा के मामले में समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौजूदा DGCA नियम पर्याप्त नहीं पाए जाते हैं तो उनमें बदलाव पर विचार किया जा सकता है।

Air India के CEO को भी किया गया तलब

इस घटना के संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के निवर्तमान CEO कैंपबेल विल्सन को भी तलब किया था।

बैठक में यह समझने की कोशिश की गई कि एयरलाइन ने घटना से किस तरह निपटा और पायलटों के नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई कमी तो नहीं रही।

AAIB की जांच में किन पहलुओं को देखा जा रहा है?

इस घटना की जांच केवल पायलट की ड्रग रिपोर्ट तक सीमित नहीं है।

AAIB तकनीकी, परिचालन, मेडिकल और मानवीय पहलुओं से जुड़े सबूतों की जांच कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, जांच में फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी और एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञ भी मदद कर रहे हैं।

इसका मतलब है कि विमान के अचानक 300 फीट नीचे आने के पीछे वास्तविक कारण जानने के लिए कई स्तरों पर जांच की जा रही है।

Air India के लिए क्यों अहम है यह मामला?

Air India के लिए यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब एयरलाइन पहले से ही सुरक्षा और संचालन से जुड़े कई सवालों का सामना कर रही है।

रिपोर्ट में पिछले साल हुए Air India Boeing 787 Dreamliner हादसे का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा भारतीय विमानन क्षेत्र के तेजी से विस्तार के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

इसलिए फुकेट-दिल्ली फ्लाइट की घटना की जांच का परिणाम न केवल संबंधित पायलट या फ्लाइट के लिए बल्कि एयरलाइन की सुरक्षा प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

अभी इस मामले में क्या स्पष्ट है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी से कुछ बातें सामने आती हैं।

  • 4 अगस्त को फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हवा में करीब 300 फीट नीचे आई।
  • विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे।
  • 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी है।
  • पायलट की पहली ड्रग स्क्रीनिंग नॉन-नेगेटिव आई थी।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दूसरी जांच पॉजिटिव आई।
  • मामले की आधिकारिक जांच AAIB कर रहा है।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी घटना पर नजर रख रहा है।
  • अंतिम कारण और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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