नई दिल्ली: CJP जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि संसद मार्च के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने अपनी पैलेट गन से कुल सात राउंड फायर किए थे। जांच के अनुसार इनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे, जबकि दो जमीन पर लगे।
यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान सामने आया था, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी।
जांच में क्या सामने आया?
CRPF द्वारा की गई आंतरिक जांच में RAF जवानों की लॉग एंट्री और ड्यूटी रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। जांच में यह पुष्टि हुई कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में तैनात एक RAF जवान ने कुल सात पैलेट राउंड फायर किए।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार—
- कुल 7 पैलेट राउंड फायर किए गए।
- 5 राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे।
- 2 राउंड जमीन पर दागे गए।
- फायरिंग उस समय की गई जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी।
क्यों करनी पड़ी पैलेट गन का इस्तेमाल?
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाकर्मियों पर पथराव और धक्का-मुक्की की गई। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सीमित स्तर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है और संबंधित अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
कई लोग हुए घायल
इस घटना में पैलेट लगने से कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें शामिल हैं—
- गुरुग्राम के 25 वर्षीय युवक
- दिल्ली विश्वविद्यालय का एक छात्र
- एक राष्ट्रीय पत्रिका से जुड़े पत्रकार
घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराया गया। उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
CRPF ने शुरू की विस्तृत जांच
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ने के बाद CRPF ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या बल प्रयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप था और परिस्थितियों के अनुसार उचित था या नहीं।
अधिकारियों द्वारा घटनास्थल की रिपोर्ट, वीडियो फुटेज और ड्यूटी रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं संभव
घटना के सामने आने के बाद इस मामले पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।
आगे क्या होगा?
CRPF की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पैलेट गन का इस्तेमाल सभी निर्धारित नियमों के तहत किया गया था या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक सामने आती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।







