वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश में शिवसेना (शिंदे गुट) ने श्रावण माह के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए आते हैं और मस्जिद में नमाज़ होने से उनकी धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं।
क्या है पूरा मामला?
शिवसेना (शिंदे गुट) के उत्तर प्रदेश उपप्रमुख अजय चौबे ने मंदिर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें श्रावण महीने के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में नमाज़ पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की गई है।
पार्टी ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
शिवसेना ने क्या तर्क दिया?
अजय चौबे का कहना है कि—
- श्रावण के दौरान लाखों कांवड़िए और श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
- इस दौरान मस्जिद परिसर में नमाज़ होने से कुछ श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
- इसलिए पूरे श्रावण महीने के लिए नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की गई है।
श्रावण कब से शुरू होगा?
रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष श्रावण माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इसी अवधि के लिए यह मांग उठाई गई है।
मंदिर प्रशासन ने क्या कहा?
शिवसेना नेताओं के अनुसार, मंदिर प्रशासन ने उनका ज्ञापन प्राप्त कर लिया है और मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
हालांकि अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है।
ज्ञानवापी विवाद की वर्तमान कानूनी स्थिति
ज्ञानवापी परिसर से जुड़ा मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है।
- हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था।
- वे परिसर के कुछ हिस्सों में पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग कर रहे हैं।
- वहीं अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी इन दावों का विरोध करती है।
- यह पूरा विवाद फिलहाल न्यायालय में लंबित है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
विवाद को लेकर क्या ध्यान रखना जरूरी है?
यह मामला संवेदनशील और न्यायालय में लंबित है। फिलहाल—
- यह केवल एक राजनीतिक दल की ओर से की गई मांग है।
- प्रशासन ने अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है।
- अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया जारी है।












