भोपाल में 3,435 जर्जर मकान बने खतरा, मानसून से पहले सिर्फ 1% भवनों पर हुई कार्रवाई
भोपाल जर्जर मकान शहर के हजारों परिवारों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। भोपाल नगर निगम (BMC) ने शहर में कुल 3,435 जर्जर भवनों की पहचान की है, लेकिन मानसून शुरू होने के बावजूद इन पर कार्रवाई बेहद धीमी रही है। निगम के आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल करीब 1% खतरनाक भवनों को ही हटाया या ध्वस्त किया गया है। ऐसे में बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
मानसून में बढ़ा हादसों का खतरा
हाल ही में भोपाल के कोतवाली क्षेत्र में लगभग 90 साल पुराने एक जर्जर मकान के गिरने की घटना ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश के कारण पुराने और कमजोर भवनों के ढहने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
शहर के पुराने इलाकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है।
शहर में कितने जर्जर भवन?
नगर निगम द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार भोपाल में स्थिति इस प्रकार है—
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल चिन्हित जर्जर भवन | 3,435 |
| सरकारी भवन | लगभग 72% |
| निजी भवन | लगभग 28% |
| अति-खतरनाक भवन | 757 |
| इस वर्ष कार्रवाई | लगभग 1% |
इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश जर्जर इमारतें सरकारी विभागों के अधीन हैं।
नोटिस तो जारी हुए, कार्रवाई नहीं
हर वर्ष मानसून से पहले नगर निगम जर्जर भवनों का सर्वे कर भवन मालिकों और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करता है।
इस वर्ष भी करीब 64% भवनों को नोटिस भेजे गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई बेहद सीमित रही। कई स्थानों पर सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि भवन आज भी लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
पुराने भोपाल और घनी बस्तियों में सबसे ज्यादा जोखिम
भोपाल के पुराने शहर, संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई इमारतें वर्षों पुरानी हैं।
इन इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि हर बारिश के मौसम में उन्हें मकान गिरने का डर सताता है। कई भवनों को खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद उनमें लोग रहने को मजबूर हैं।
ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की स्थिति गंभीर
ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में सैकड़ों मकानों को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका है।
इसके बावजूद यहां रहने वाले परिवार आज भी उन्हीं भवनों में रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल नोटिस जारी करता है, लेकिन पुनर्वास या भवन हटाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते।
नगर निगम ने क्या कहा?
नगर निगम का कहना है कि अधिकांश जर्जर भवन कानूनी विवादों और न्यायालय में लंबित मामलों के कारण तत्काल नहीं हटाए जा सकते।
प्रशासन के अनुसार—
- कई भवनों पर स्वामित्व विवाद चल रहे हैं।
- कुछ मामलों में कोर्ट की अनुमति आवश्यक होती है।
- सुरक्षा संबंधी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होती है।
हालांकि नागरिकों का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं के चलते लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।
नागरिकों की बढ़ी चिंता
मानसून के दौरान कमजोर भवनों के गिरने की घटनाएं हर साल सामने आती हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि—
- जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत या ध्वस्तीकरण नहीं हो रहा।
- कई भवनों के बाहर चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए।
- प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई भवन जर्जर दिखाई दे तो नागरिकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय
- जर्जर भवनों के पास अनावश्यक खड़े न हों।
- भारी बारिश के दौरान ऐसे भवनों से दूरी बनाए रखें।
- भवन में दरार, झुकाव या छत से मलबा गिरने जैसी स्थिति दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
- खतरनाक घोषित भवनों में रहने से बचें।
क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
भोपाल में जर्जर भवनों की बड़ी संख्या और सीमित कार्रवाई प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती बन चुकी है।
यदि समय रहते अति-खतरनाक भवनों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो मानसून के दौरान जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने के बजाय त्वरित कार्रवाई, पुनर्वास और नियमित निगरानी की आवश्यकता है।










