पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं है। उनकी गैरमौजूदगी में अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और छात्र संगठन AISA से जुड़े कई छात्र भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
क्यों अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे। लगातार 21 दिन तक भूख हड़ताल करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी वांगचुक ने ड्रिप, दवा या किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ लेने से इनकार कर दिया। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने भी कहा कि उनकी सहमति के बिना कोई चिकित्सकीय हस्तक्षेप न किया जाए।
अब कौन कर रहा है भूख हड़ताल?
1. अभिजीत दीपके
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि आंदोलन जारी रहेगा और 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च भी अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा।
2. नेहा
27 वर्षीय नेहा, उत्तराखंड की रहने वाली हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में थिएटर एंड परफॉर्मिंग स्टडीज़ में पीएचडी कर रही हैं।
वह छात्र संगठन AISA से जुड़ी हैं और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
नेहा का कहना है कि सोनम वांगचुक को हटाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनके अनुसार, छात्र अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
3. मनीष कुमार
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी मनीष कुमार AISA के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
4. आमीन
भूख हड़ताल पर बैठे तीसरे छात्र आमीन भी AISA से जुड़े हैं।
उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और नई शिक्षा नीति (NEP) से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करना भी है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- परीक्षा पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच।
- शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना।
- शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की जांच।
- छात्रों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली।
20 जुलाई का ‘चलो संसद’ मार्च
आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है।
सोनम वांगचुक ने अस्पताल ले जाए जाने से पहले एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से बड़ी संख्या में इस मार्च में शामिल होने की अपील की थी। उनका कहना था कि आंदोलन की असली ताकत जनता की भागीदारी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखे।
अदालत ने कहा कि यदि डॉक्टरों की राय में उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है, तो उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इसी आदेश के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
CJP और AISA की भूमिका
इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है, जबकि छात्र संगठन AISA भी इसका समर्थन कर रहा है।
हालांकि, दोनों संगठनों के मंच और टेंट जंतर-मंतर पर अलग-अलग लगाए गए हैं, लेकिन दोनों की मांगें शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही से जुड़ी हैं।
क्या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अभिजीत दीपके और AISA के छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। अब कई छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इसे आगे बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रस्तावित संसद मार्च और सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।












