नई दिल्ली: 20 जुलाई को प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन अब सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस खुलकर सामने आ चुकी है। इसी बीच दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, उनकी मौजूदगी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
कांग्रेस के समर्थन से बदला राजनीतिक माहौल
शुरुआत में दूरी बनाए रखने वाली कांग्रेस ने अब सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। राहुल गांधी ने भी वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद विपक्ष की रणनीति को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
क्या सोनिया गांधी भी पहुंच सकती हैं?
राजनीतिक सूत्रों और चर्चाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस अपने शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी के जरिए इस आंदोलन को बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। हालांकि, सोनिया गांधी के जंतर-मंतर पहुंचने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
20 जुलाई क्यों बन गई है बड़ी तारीख?
20 जुलाई को संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इसी दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और संसद मार्च की भी तैयारी है। इस वजह से राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
विपक्ष की ताकत का होगा इम्तिहान
यदि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता या अन्य विपक्षी दलों के बड़े चेहरे जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो यह आंदोलन एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजर कांग्रेस के अगले कदम और 20 जुलाई के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
निष्कर्ष
20 जुलाई का दिन केवल सोनम वांगचुक के आंदोलन के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। सोनिया गांधी के शामिल होने को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम तस्वीर कार्यक्रम शुरू होने के बाद ही साफ होगी।












