वॉशिंगटन: ईरान युद्ध अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अमेरिका की घरेलू राजनीति, सैन्य रणनीति और आम जनता की सोच पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्हाइट हाउस को ईरान पर लगातार हवाई हमले रोकने की सलाह दी है। वहीं, हालिया सर्वे में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों ने भी युद्ध समाप्त करने की इच्छा जताई है।
अमेरिकी जनरल ने क्यों दी हमले रोकने की सलाह?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने प्रशासन को बताया कि लगातार दो सप्ताह तक चले सैन्य अभियान के बाद ईरान के अधिकांश निर्धारित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।
उनका आकलन था कि यदि अमेरिका बड़े पैमाने पर युद्ध को आगे नहीं बढ़ाना चाहता, तो रोजाना हवाई हमले जारी रखने से अतिरिक्त सैन्य लाभ मिलने की संभावना कम है।
बताया जा रहा है कि इस सलाह के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज क्षेत्र में हमलों को सीमित करने का फैसला लिया।
एयर डिफेंस मिसाइलों की कमी भी बनी चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने यह भी चेतावनी दी कि लगातार अभियानों के कारण एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से घट रहा है।
विशेष रूप से:
- THAAD इंटरसेप्टर
- Patriot एयर डिफेंस मिसाइलें
इनकी उपलब्धता में कमी भविष्य में अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।
अमेरिकी जनता भी युद्ध से थकी
हाल ही में सामने आए CBS News–YouGov सर्वे के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष उम्मीद से कहीं अधिक लंबा और कठिन साबित हुआ है।
सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष:
- तीन-चौथाई से अधिक लोगों ने युद्ध को अपेक्षा से ज्यादा कठिन बताया।
- लगभग दो-तिहाई अमेरिकी चाहते हैं कि यह संघर्ष जल्द समाप्त हो।
- केवल एक-तिहाई उत्तरदाताओं ने युद्ध जारी रखने का समर्थन किया।
महंगाई और तेल की कीमतों का असर
ईरान युद्ध का प्रभाव केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण:
- वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
- अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई।
- आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर दिखाई देने लगा।
यही कारण है कि घरेलू स्तर पर भी युद्ध के खिलाफ आवाजें तेज हो रही हैं।
पेंटागन के आंकड़ों पर उठे सवाल
इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन भी विवादों में घिर गया है।
रिपोर्टों के अनुसार:
- पहले सैनिकों के घायल होने के आंकड़े कम बताए गए।
- बाद में रिकॉर्ड अपडेट कर 140 से अधिक अतिरिक्त घायल सैनिकों को सूची में जोड़ा गया।
- “Overseas Operations” नाम से नई श्रेणी भी जोड़ी गई।
इन बदलावों के बाद कई सांसदों ने रक्षा विभाग से पारदर्शिता पर सवाल उठाए और स्पष्टीकरण मांगा।
पेंटागन की सफाई
पेंटागन का कहना है कि वेबसाइट पर तकनीकी समस्या के कारण आंकड़ों में अस्थायी गड़बड़ी हुई थी। हालांकि नई कैटेगरी और संशोधित रिकॉर्ड को लेकर उठे सभी सवालों का विस्तृत जवाब अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अमेरिका के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
ईरान युद्ध के चलते अमेरिका इस समय तीन प्रमुख मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है:
- लगातार सैन्य संसाधनों की खपत।
- जनता के बीच युद्ध के प्रति बढ़ती नाराजगी।
- रक्षा विभाग की पारदर्शिता पर उठते सवाल।
इन तीनों कारणों ने अमेरिकी प्रशासन की रणनीति को और जटिल बना दिया है।








