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CBI Raid: ₹1,109 करोड़ Canara Bank Fraud Case में Gupta Power Infrastructure पर बड़ी कार्रवाई

On: July 20, 2026 1:52 AM
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Gupta Power Infrastructure Bank Fraud
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कथित ₹1,109 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा की कंपनी Gupta Power Infrastructure Ltd. से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के Canara Bank से प्राप्त क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।

बताया जा रहा है कि जांच के तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड में स्थित कंपनी के कार्यालयों, फैक्ट्रियों और निदेशकों के आवासों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

CBI के अनुसार कंपनी पर आरोप है कि उसने बैंक से अधिक ऋण और क्रेडिट लिमिट प्राप्त करने के लिए अपने वित्तीय दस्तावेजों में कथित रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की।

जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी ने स्टॉक का मूल्य वास्तविकता से अधिक दिखाया, व्यापारिक देनदारियों (Trade Receivables) का आंकड़ा बढ़ाकर प्रस्तुत किया और वित्तीय विवरणों में कथित हेरफेर कर बैंक से अतिरिक्त वित्तीय सुविधाएं हासिल कीं।

इसके अलावा एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया या नहीं।

Canara Bank को कितना नुकसान?

प्रारंभिक जांच के अनुसार इस कथित मामले में Canara Bank को लगभग ₹1,109 करोड़ का वित्तीय नुकसान होने की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर CBI ने विस्तृत जांच शुरू की है।

हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई अदालत और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

‘Evergreening’ क्या होता है?

इस मामले में जांच एजेंसी ने Evergreening of Loan का भी उल्लेख किया है।

बैंकिंग क्षेत्र में Evergreening का अर्थ है कि किसी पुराने ऋण की किस्तें समय पर जमा नहीं होने पर उसी उधारकर्ता को नया या अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए, जिससे पुराना ऋण कागजों में नियमित दिखाई देता रहे। इससे वास्तविक Non-Performing Asset (NPA) की स्थिति छिप सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा किया जाता है तो बैंक की वास्तविक वित्तीय स्थिति का सही आकलन करना कठिन हो जाता है।

किन-किन स्थानों पर हुई कार्रवाई?

CBI की जांच कई राज्यों तक फैली हुई है। जांच के दौरान जिन स्थानों पर कार्रवाई की गई उनमें शामिल हैं—

  • पश्चिम बंगाल स्थित कंपनी का पंजीकृत कार्यालय।
  • ओडिशा में निदेशकों के आवास।
  • उत्तराखंड के काशीपुर स्थित विनिर्माण इकाई।
  • तमिलनाडु के तिरुवल्लूर स्थित प्लांट।
  • ओडिशा में कंपनी से जुड़े अन्य व्यावसायिक परिसर।

इन सभी स्थानों से जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड एकत्र किए गए हैं।

जांच एजेंसी क्या पता लगाने की कोशिश कर रही है?

CBI फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि—

  • बैंक से प्राप्त ऋण का वास्तविक उपयोग कहाँ हुआ।
  • क्या वित्तीय दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी।
  • क्या कंपनी ने बैंकिंग नियमों का उल्लंघन किया।
  • क्या किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भी इस मामले में भूमिका रही।

जांच पूरी होने के बाद यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैंकिंग सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कॉर्पोरेट लोन की नियमित निगरानी, ऑडिट प्रक्रिया को मजबूत करना और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाना भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकता है।

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